"डीओपीटी का पलटवार: IAS नियम बदलाव से राष्ट्र से पहले, राज्य मजबूत होंगे"

राज्य सरकारों के विरोध के बावजूद, केंद्र सरकार के डीओपीटी (DoPT) ने IAS कैडर नियमों में संशोधन को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम बताया है।

"डीओपीटी का पलटवार: IAS नियम बदलाव से राष्ट्र से पहले, राज्य मजबूत होंगे"

नई दिल्ली, 23 दिसंबर 2025: पिछले दिनों कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने तमिलनाडु सीएम एम.के. स्टालिन के IAS कैडर नियमों पर विरोध को "गलतफहमी" करार देते हुए विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया था।

विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम सहकारी संघवाद को मजबूत कर रहे हैं, न कि कमजोर। राज्य अधिकारी केंद्र में अनुभव प्राप्त कर लौटेंगे, जिससे उनका कौशल बढ़ेगा।" स्टालिन के पत्र का जवाब देते हुए DoPT ने जोर दिया कि बिना संशोधन के केंद्रीय सेवाओं में 25-30% पद रिक्त रह जाते हैं, जो राष्ट्रीय विकास को बाधित करता है।

स्रोतों के मुताबिक, केंद्र ने 9 गैर-BJP राज्यों के विरोध के बावजूद नियमों को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। डीओपीटी ने स्पष्ट किया कि IAS (रेगुलेशन ऑफ डायरेक्ट रिक्रूटमेंट बाय प्रमोशन) नियम 1954 में बदलाव का उद्देश्य राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देना है। केंद्र का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था में राज्य अपने वरिष्ठ अधिकारियों को एपेक्स स्केल (₹2.25 लाख फिक्स्ड) में प्रमोट कर लेते हैं, जिससे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए योग्य अधिकारी कम पड़ जाते हैं।

इससे राष्ट्रीय योजनाओं जैसे डिजिटल इंडिया, स्वास्थ्य मिशन और आपदा प्रबंधन प्रभावित होते हैं।। प्रमुख बिंदुप्रतिनियुक्ति अनिवार्यता: नए नियम राज्यों को 1/3 IAS अधिकारियों को केंद्र के लिए अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने को कहते हैं, ताकि संतुलन बने।

राज्यों को लाभ: डीओपीटी के अनुसार, इससे राज्यों को भी अधिक प्रमोशन अवसर मिलेंगे, क्योंकि केंद्र बड़े कैडर पूल से अधिकारियों को साझा करेगा।पिछले उदाहरण: तमिलनाडु सहित कई राज्यों के एपेक्स प्रमोशन प्रस्ताव पहले ही अस्वीकार हो चुके, क्योंकि वे DoPT दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते। (XYZ)