बीजेपी संविधान खत्म करने की साजिश रच रही - राहुल गांधी

बीजेपी संविधान खत्म करने की साजिश रच रही - राहुल गांधी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी पर भारतीय संविधान को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। राहुल ने कहा- बीजेपी संविधान की उस मूल भावना को खत्म करना चाहती है, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार देती है। राहुल 17 से 19 दिसंबर तक जर्मनी की यात्रा पर पहुंचे थे।

इस दौरान 18 अक्टूबर को उन्होंने बर्लिन स्थित हर्टी स्कूल में छात्रों को संबोधित किया था। कांग्रेस ने सोमवार रात इस बातचीत का एक घंटे लंबा वीडियो जारी किया। राहुल ने कहा- लोकतांत्रिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही हैं। CBI और ED जैसी एजेंसियों का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। हम सिर्फ बीजेपी से नहीं लड़ रहे, हम उनके भारतीय संस्थागत ढांचे और एजेंसियों पर कब्जे के खिलाफ भी लड़ रहे हैं। हमने तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश के चुनाव जीते हैं। हमने हरियाणा के चुनाव भी जीते हैं, इसमें कोई शक नहीं है। मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाया कि एक ब्राजील की महिला हरियाणा के मतदाता सूची में थी। जब हमने यह प्रश्न चुनाव आयोग से पूछे तो उन्होंने जवाब नहीं दिया। हमें लगता है कि महाराष्ट्र के चुनाव भी निष्पक्ष नहीं थे। हम इस समय देश और दुनिया में बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। पहले भारत को अमेरिका के प्रभुत्व वाले दुनिया से फायदा हुआ, जहां अमेरिका दुनिया के नियम बनाता था, भले इसमें कुछ गलतियां थीं। अब अमेरिका की ताकत सेना, अर्थव्यवस्था और पैसा संबंधी मामलों में चुनौती का सामना कर रही है। साथ ही अमेरिका के अपने अंदर भी कई समस्याएं हैं। एक बड़ी चुनौती यह है कि उत्पादन का काम ज्यादातर चीन के हाथ में चला गया है। इसके कारण भारत, अमेरिका या जर्मनी जैसे देश केवल सेवा क्षेत्र से बड़े पैमाने पर रोजगार नहीं पैदा कर सकते। मैन्युफैक्चरिंग और उत्पादन बहुत जरूरी हैं, लेकिन अब यह क्षेत्र चीन के पास ज्यादा है।

भारत में बड़े पैमाने पर रोजगार केवल मैन्युफैक्चरिंग से ही पैदा हो सकते हैं। लेकिन बीजेपी ने कुछ बड़े बिजनेस ग्रुप्स जैसे अडानी और अंबानी पर ज्यादा ध्यान देकर इसे रोक दिया है, जो उत्पादन की बजाय व्यापार पर जोर देते हैं। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को नोटबंदी और GST जैसी नीतियों से नुकसान हुआ। जो कुछ हो रहा है वह भारत के दो दृष्टिकोणों के बीच संघर्ष है। एक दृष्टिकोण एक सशक्त नेता (BJP और RSS) के शासन में विश्वास करता है, जबकि दूसरा मानता है कि भारत को बातचीत, सहमति और अपने विविध राज्यों और संस्कृतियों की आवाजों के माध्यम से चलाया जाना चाहिए। भारत इतना बड़ा और विविध देश है कि इसका भविष्य केवल एक व्यक्ति तय नहीं कर सकता। हमारा संविधान इसे राज्यों का संघ मानता है, जहां सभी की राय सुननी चाहिए। लेकिन नई सरकार (BJP) इस पर चर्चा नहीं करना चाहती।