रामपुर में अनोखा पारिवारिक विवाद, पंचायत ने किया पति का ‘साप्ताहिक बंटवारा’
दो पत्नियों की जिद से बढ़ा मामला, पुलिस के बाद पंचायत ने निकाला समाधान, रविवार को पति को मिली छुट्टी
रामपुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक हैरान करने वाला और चर्चा में बना मामला सामने आया है। यहां एक युवक की दो पत्नियों के बीच पति को अपने पास रखने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। यह विवाद इतना बढ़ गया कि रोज़ाना घर में झगड़े होने लगे और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आपसी समझौते के लिए गांव की पंचायत को हस्तक्षेप करने की जिम्मेदारी सौंपी। जहां एक अनोखा फैसला लिया गया।
अरेंज मैरिज और लव मैरिज बनी विवाद की जड़ जानकारी के अनुसार युवक की पहली शादी परिजनों की सहमति से अरेंज मैरिज के रूप में हुई थी। कुछ वर्षों बाद युवक का एक अन्य महिला से प्रेम संबंध हो गया और उसने दूसरी शादी भी कर ली। दोनों पत्नियां पति पर अपना पूरा अधिकार जताने लगीं। पहली पत्नी का कहना था कि वह कानूनी पत्नी है और पति को उसी के साथ रहना चाहिए, वहीं दूसरी पत्नी भी खुद को उपेक्षित महसूस कर रही थी। इसी बात को लेकर आए दिन घर में तनाव और झगड़े होते रहे।
पुलिस तक पहुंचा मामला लगातार बढ़ते पारिवारिक कलह से परेशान होकर दोनों पक्ष थाने पहुंचे। पुलिस ने दोनों पत्नियों और पति की बात सुनी, लेकिन कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिखा। मामला पूरी तरह पारिवारिक और सामाजिक होने के कारण पुलिस ने गांव की पंचायत को बुलाकर सुलह कराने का निर्णय लिया।
पंचायत में घंटों चली बैठक गांव की पंचायत में दोनों पत्नियों, पति और परिवार के बुजुर्गों की मौजूदगी में लंबी चर्चा हुई। पंचायत सदस्यों ने सभी पक्षों की बात सुनी और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया। अंततः पंचायत ने ऐसा फैसला सुनाया, जिसने पूरे गांव का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
पति का साप्ताहिक बंटवारा पंचायत के निर्णय के अनुसार— पति सप्ताह में तीन दिन पहली पत्नी के साथ रहेगा। अगले तीन दिन दूसरी पत्नी के साथ बिताएगा। रविवार का दिन पति के लिए छुट्टी का रहेगा, यानी उस दिन वह किसी भी पत्नी के यहां रहने के लिए बाध्य नहीं होगा। पंचायत का तर्क था कि इस व्यवस्था से दोनों पत्नियों को बराबर समय मिलेगा और घर में होने वाले झगड़ों पर रोक लगेगी।
गांव में बना चर्चा का विषय पंचायत के इस फैसले के बाद मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। कुछ ग्रामीणों ने इसे पंचायत की सूझबूझ बताया, तो कुछ ने इसे सामाजिक व्यवस्था के लिए अजीब उदाहरण करार दिया। हालांकि, फिलहाल दोनों पत्नियों और पति ने पंचायत के फैसले को मानने पर सहमति जताई है।
रामपुर का यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि पारिवारिक विवाद जब कानूनी और सामाजिक दायरे से बाहर निकलते हैं, तो पंचायतें आज भी समाधान का माध्यम बन रही हैं। पंचायत का यह फैसला कितना प्रभावी साबित होगा, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन फिलहाल इस अनोखे निर्णय ने झगड़ों से परेशान परिवार को राहत की उम्मीद जरूर दी है। (H24S)