अमेरिका को बड़ा झटका, यूरोपीय संसद ने रोकी ट्रेड डील
टैरिफ धमकियों और ग्रीनलैंड विवाद के चलते EU-US व्यापार संबंधों में बढ़ा तनाव
अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। यूरोपीय संसद ने अमेरिका के साथ होने वाली बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील की मंजूरी प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले को अमेरिका के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक झटका माना जा रहा है। यूरोपीय संसद का कहना है कि जब तक अमेरिका टैरिफ की धमकियों और राजनीतिक दबाव की नीति से पीछे नहीं हटता, तब तक “बिजनेस ऐज यूजुअल” संभव नहीं है।
टैरिफ धमकियों से बिगड़े हालात यूरोपीय सांसदों के अनुसार, हाल के दिनों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनियों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। खास तौर पर ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयानों और व्यापारिक दबाव को यूरोप ने अस्वीकार्य बताया है। यूरोपीय संसद की अंतरराष्ट्रीय व्यापार समिति ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की धमकी या दबाव के माहौल में निष्पक्ष व्यापार समझौता आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
क्या थी प्रस्तावित ट्रेड डील यह व्यापार समझौता अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने, आयात-निर्यात को सरल बनाने और दोनों पक्षों के उद्योगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। समझौते के तहत कई उत्पादों पर शुल्क में कटौती और बाजार तक आसान पहुंच की बात शामिल थी। हालांकि, इसे लागू करने के लिए यूरोपीय संसद की औपचारिक मंजूरी जरूरी थी, जिसे अब रोक दिया गया है।
यूरोपीय संसद का कड़ा संदेश यूरोपीय संसद के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि यूरोप किसी भी तरह की “आर्थिक ब्लैकमेलिंग” को स्वीकार नहीं करेगा। संसद सदस्यों का मानना है कि व्यापार समझौते आपसी सम्मान और स्थिरता के आधार पर होने चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव के जरिए। इसी कारण यह फैसला लिया गया कि जब तक अमेरिका अपनी नीति में नरमी नहीं दिखाता, तब तक ट्रेड डील पर आगे की कार्रवाई नहीं होगी।
अमेरिका पर संभावित असर विशेषज्ञों के मुताबिक, इस फैसले से अमेरिका-EU व्यापार संबंधों में ठहराव आ सकता है। दोनों के बीच सालाना अरबों डॉलर का व्यापार होता है और समझौते के रुकने से वैश्विक सप्लाई चेन, निर्यातकों और निवेशकों पर असर पड़ सकता है। साथ ही, इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
आगे क्या? यूरोपीय संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका टैरिफ धमकियों को वापस लेता है और बातचीत का सकारात्मक रास्ता अपनाता है, तो समझौते पर दोबारा विचार किया जा सकता है। वहीं, अगर तनाव बढ़ता है तो दोनों पक्षों के बीच ट्रेड वॉर जैसी स्थिति भी बन सकती है।
यूरोपीय संसद का यह कदम स्पष्ट करता है कि वैश्विक व्यापार में अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन भी अहम भूमिका निभा रहा है। अमेरिका के लिए यह फैसला चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि दबाव की नीति के बजाय संवाद और सहयोग ही स्थायी समाधान है। (H 24)