तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में - सदानंद सरस्वती
द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा- 3 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में हैं। प्रशासन उनका सर्टिफिकेट मांगने वाला कौन होता है? उसे कोई अधिकार नहीं। प्रशासन ने निर्दोष ब्राह्मणों के साथ जो निर्दयता से मारपीट की, वह बेहद निंदनीय है। सदानंद सरस्वती ने यह बात जबलपुर में नर्मदा जन्मोत्सव कार्यक्रम में कही।
इधर, माघ मेले में शिविर के बाहर धरने पर बैठे अविमुक्तेश्वरानंद ने तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा- अगर केशव मौर्य का बस चलता तो वो कब का हमें नहलाकर चले गए होते। उनको डांटा जा रहा। यहां आने नहीं दिया जा रहा। एक समझदार नेता को दबा दिया गया। उन्होंने कहा- आज की लड़ाई हिंदू-मुसलमान या अंग्रेज-भारतीय की नहीं, नकली हिंदू और असली हिंदू के बीच है।
रविवार को उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य प्रयागराज पहुंचे। सर्किट हाउस में शंकराचार्य विवाद से जुड़े सवाल पर कहा- जब मुझसे बात करने को कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं पूज्य शंकराचार्य से प्रार्थना कर सकता हूं, उनके चरणों में शीश झुकाकर निवेदन करता हूं कि संगम में स्नान कर विवाद खत्म करें।
शंकराचार्य विरोध खत्म कर करें स्नान, अभद्रता की होगी जांच - केशव प्रसाद मौर्य
माघ मेला प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच 9 दिन से विवाद चल रहा है। कम या खत्म होने की बजाय मामला बढ़ता जा रहा। रविवार को अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था- कितने भी जुल्म कर लो, पीछे नहीं हटूंगा। माघ मेले में ध्वजारोहण करने के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आज की लड़ाई हिंदू-मुसलमान या अंग्रेज-भारतीय की नहीं, नकली हिंदू और असली हिंदू के बीच है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि युद्ध एक ही परिवार के भीतर हुआ था। जहां एक पक्ष अन्याय के साथ सत्ता में था और दूसरा पक्ष धर्म के साथ। संसाधन विहीन होकर भी श्रीकृष्ण के साथ खड़ा था। उन्होंने कहा- भारत से भारतीयता धीरे-धीरे समाप्त की जा रही है। न भाषा बची है, न भाव और न ही पूर्वज विद्वानों के प्रति सम्मान। सनातन परंपरा के अनुसार जीवन जीने वालों पर लगातार प्रहार हो रहा। शंकराचार्य, दंडी स्वामी, ब्रह्मचारी, महिलाएं और वृद्ध सभी इस व्यवस्था के शिकार बन रहे। धर्म के पक्ष में खड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा।
बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे
ज्ञात हो कि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोककर पैदल जाने को कहा। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। मारपीट की गई। पुलिस उनकी पालकी खींचकर दूर ले गई। इसके बाद वे शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रशासन ने दो नोटिस दिए। पहले में शंकराचार्य की पदवी लिखने पर और दूसरे में मौनी अमावस्या के दिन हंगामा करने पर सवाल पूछे। चेतावनी दी गई कि माघ मेले से बैन किया जा सकता है। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया।