हेट स्पीच को लेकर कर्नाटक विधानसभा में विधेयक पारित

हेट स्पीच को लेकर कर्नाटक विधानसभा में विधेयक पारित

कर्नाटक विधानसभा ने विपक्ष के ज़ोरदार विरोध के बीच कर्नाटक हेट स्पीच और हेट क्राइम (रोकथाम) विधेयक, 2025 पारित कर दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस विधेयक में नफरती अपराधों के लिए सात साल तक की कैद और 50,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

यह विधेयक सार्वजनिक रूप से मौखिक, मुद्रित, सार्वजनिक या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से दिए गए भाषण या संवाद पर लागू होगा. नफरत जन्य अपराध करने वालों के लिए विधेयक में कम से कम एक वर्ष की कैद का प्रावधान है, जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही ऐसे अपराधियों पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा. वहीं, बार-बार अपराध करने पर सजा कम से कम दो साल होगी, जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, साथ ही 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

इस विधेयक को पेश करते हुए गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने इस वर्ष 5 मई को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने सांप्रदायिक घृणा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया था. उन्होंने कहा कि नफरती भाषणों के कारण हत्याएं और अंतर-सामुदायिक हिंसा हुई है, जिससे सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा है।

गृह मंत्री अनुसार, यह विधेयक धर्म, जाति, लिंग, भाषा और अन्य पहचानों पर आधारित भेदभाव को दूर करके संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए बनाया गया है। जी. परमेश्वर ने आगे कहा कि विधेयक का उद्देश्य घृणास्पद भाषणों और ऐसे अपराधों के प्रसार, प्रकाशन या प्रचार को रोकना है, जो ‘समाज में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह के प्रति असामंजस्य और घृणा उत्पन्न करते हैं.’ एक अलग कानून की आवश्यकता पर जोर देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​भड़काऊ भाषण देने वाले वक्ताओं के खिलाफ अनिश्चित काल तक निवारक प्रतिबंधों पर निर्भर नहीं रह सकतीं। उन्होंने कहा, ‘अगर हमें सूचना मिलती है कि किसी व्यक्ति का भाषण तनाव पैदा कर सकता है, तो हम उस पर प्रतिबंध लगा देंगे. हम ऐसा कब तक कर सकते हैं? इसलिए, एक कानून आवश्यक है, उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे भाषणों के बाद अक्सर हिंसक घटनाएं होती हैं।

इस विधेयक के तहत सरकार को किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म से नफरती भाषण सामग्री हटाने का निर्देश देने का अधिकार दिया गया है. इसके दायरे में सार्वजनिक स्थानों पर मौखिक, मुद्रित, सार्वजनिक प्रदर्शन या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से किए गए भाषण, बातचीत या संवाद शामिल हैं। इस विधेयक में हेट क्राइम यानी नफरतजन्य अपराध को इस प्रकार परिभाषित किया गया है: ‘किसी भी व्यक्ति (जीवित या मृत) या व्यक्तियों के समूह या संगठन के प्रति असामंजस्य, शत्रुता, घृणा या दुर्भावना उत्पन्न करने के उद्देश्य से नफरती भाषण देना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना, या ऐसे नफरती भाषण को बढ़ावा देना, प्रचारित करना, उकसाना, सहायता करना या प्रयास करना।

विधेयक हेट स्पीच को संज्ञेय, गैर-जमानती अपराध बनाने का प्रयास करता है. इसके अलावा, अपराधियों पर प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) की अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है। विधेयक में कहा गया है, ‘किसी संगठन या संस्था के मामले में अपराध के समय प्रभारी और जिम्मेदार प्रत्येक व्यक्ति को दोषी माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और तदनुसार दंडित किया जाएगा। मालूम हो कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने तटीय कर्नाटक में सांप्रदायिक हिंसा की सिलसिलेवार घटनाओं के बाद, जिसकी शुरुआत अप्रैल में एक मुस्लिम व्यक्ति अशरफ की पीट-पीटकर हत्या से हुई थी, जून में हेट स्पीच कानून पर चर्चा शुरू की थी।