वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पदोन्नति पर केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार आमने सामने

"तमिलनाडु सरकार के प्रस्ताव को केंद्र के DoPT द्वारा खारिज किये के बाद तमिलनाडु सरकार की बुलाई बैठक मे केंद्र सरकार के अधिकारी जाने को तैयार"

वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के पदोन्नति पर केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार आमने सामने

तमिलनाडु सरकार ने 1995 बैच के IAS अधिकारियों को पदोन्नति देने के लिए 29 तारीख को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। इस समिति में केंद्रीय सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं, को आमंत्रित किया गया है।

29 तारीख को प्रस्तावित इस बैठक के माध्यम से तमिलनाडु सरकार केंद्र सरकार द्वारा पहले ही अस्वीकृत प्रस्ताव को पुनः लागू करने का प्रयास कर रही है।

यह उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने पहले ही स्पष्ट रूप से कहा है कि तमिलनाडु राज्य में अतिरिक्त मुख्य सचिव (Apex Scale) पदों की संख्या स्वीकृत सीमा से अधिक है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा यह कदम उठाया जाना गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है। यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर भारत सरकार के नियमों, IAS (Pay) Rules, 2016 और All India Services की संवैधानिक संरचना को चुनौती देने जैसा है। एक ओर केंद्र सरकार स्पष्ट रूप से नियमों का पालन करने पर ज़ोर दे रही है।

वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु सरकार अपने स्तर पर निर्णय लेकर केंद्र की स्वीकृति के बिना पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है। यह स्थिति ‘तमिलनाडु सरकार बनाम भारत सरकार’ के रूप में उभर कर सामने आई है। यदि यह बैठक होती है और इसके आधार पर पदोन्नति दी जाती है, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक गलत मिसाल बनेगा।

यह प्रश्न केवल 6 IAS अधिकारियों की पदोन्नति तक सीमित नहीं है।

यह प्रश्न है: — क्या कोई राज्य सरकार केंद्र सरकार के स्पष्ट आदेश को नज़रअंदाज़ कर सकती है?

— क्या All India Services की एकरूपता और अनुशासन को इस प्रकार कमजोर किया जा सकता है?

— क्या नियमों और संवैधानिक मर्यादाओं के ऊपर राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव स्वीकार्य है?

यदि ऐसा किया जाता है, तो यह न केवल प्रशासनिक अराजकता को जन्म देगा, बल्कि संघीय ढांचे को भी नुकसान पहुँचाएगा। इस पूरे प्रकरण में यह देखना आवश्यक है कि भारत सरकार के अधिकारी इस बैठक में भाग लेकर क्या केंद्र सरकार के निर्णयों को कमजोर कर रहे हैं।

अंततः यह मामला केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश की प्रशासनिक व्यवस्था और संवैधानिक अनुशासन से जुड़ा हुआ है।